मंगलवार, 27 नवंबर 2018

= सुन्दर पदावली(१२. राग बिलावल(कायाबेली ग्रंथ ६/१) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १२. राग बिलावल(काया बेली ग्रन्थ) =*
(६) 
*कैसैं राम मिलै मोहि संतो यह मन थिर न रहाई रे ।* 
*निहचल निमष होत नहि कबहौं चहुं दिशि भागा जाई रे ॥टेक॥* 
हे सन्तजन ! मुझे राम के दर्शन कैसे हो सकते हैं, जबकि मेरा चित्त ही स्थिर नहीं है । यह क्षणमात्र के लिये भी स्थिर नहीं होता, यह तो दिन रात चारों दिशाओं में(इधर उधर) दौड़ता रहता है ॥टेक॥ 
*कौंन उपाय करौं या मन कौ कैसी बिधि अटकाऊं रे ।* 
*ऐसैं छूटि जाइ या तन सैं कतहूं षोज न पाऊं रे ॥१॥* 
इसकी स्थिरता के लिये मैं क्या उपाय करूँ कि यह कहीं किसी को आधार मानकर वहाँ स्थिर हो जाय । यह तो मेरे शरीर से ऐसा निकल भागता है कि मैं इसे कहीं खोज ही नहीं पाता ॥१॥
(क्रमशः)

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