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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= १२. राग बिलावल(काया बेली ग्रन्थ) =*
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(१०)
*गुरु बिन गति गोबिंद की जांनी नहिं जाई ।*
*हौं सेवग उस पुरुष का मोहि देह लषाई ॥टेक॥*
गुरुपदेश बिना गोविन्द की गति(भगवत्प्राप्ति) का उपाय नहीं जाना जा सकता । मैं उस सिद्ध पुरुष का जीवन पर्यन्त दास(सेवक) बना रहूँगा जो मुझ को यह उपाय बता देगा ॥टेक॥
*योगी यंगम सेवडा अरु बोध संन्यासी ।*
*सेष मसाइक औलिया बूझे बनबासी ॥१॥*
मैने इसकी प्राप्ति के लिये, अनेक योगी, जंगम बौद्ध, संन्यासी, शेख, मूसापन्थी मुस्लिम साधक, ओलिया(मुस्लिम सिद्ध) तथा वनवासी(वन में साधना करने वाले सिद्ध) तपस्वियों का सत्संग किया(परन्तु कहीं सफलता नहीं मिली) ॥१॥
*जोगी तौ गोरष जपै जंगम शिव ध्यावै ।*
*अरिहंत अरिहंत सेवडा कहुं पार न पावै ॥२॥*
वहाँ मुझे गोरखपन्थी जोगी तो गोरखनाथ का नाम जपते हुए मिले और जंगम साधु शिव का ध्यान कर रहे थे । अर्हंत् को मानने वाले जैन साधुओं के विषय में तो ज्ञात ही नहीं हुआ । वे किसकी साधना कर कहाँ पहुँचना चाहते हैं ॥२॥
(क्रमशः)

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