बुधवार, 5 दिसंबर 2018

= पारिख का अँग(२७ - २२/२४) =



#daduji 
卐 सत्यराम सा 卐 
*श्री दादू अनुभव वाणी* टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*पारिख का अँग २७* 
श्रवणा हैं नैना नहीं, ता तैं खोटा खाहिं ।
ज्ञान विचार न ऊपजे, साच झूठ समझाहिं ॥२२॥
जिसके श्रवण तो हों और नेत्र न हों, वह भोजन के गुणों को तो सुनकर जान लेगा किन्तु उसमें पड़ी मक्खी खाकर वमन का क्लेश उठायेगा । वैसे ही जिनके श्रवण करने पर भी मन में ज्ञान - विचार नहीं उत्पन्न होते, वे सत्य को मिथ्या और मिथ्या को सत्य समझ कर दु:ख ही पाते हैं । अत: अपरीक्षक हैं ।
साच
दादू साचा लीजिये, झूठा दीजे डार ।
साचा सन्मुख राखिये, झूठा नेह निवार ॥२३॥
२३ - २४ में सत्य ग्रहण की प्रेरणा तथा विशेषता का वर्णन कर रहे हैं, सत्य विचारों को ही धारण करो, मिथ्या मनोरथों को छोड़ दो और सत्य परब्रह्म को ही व्यापक जानकर सर्वदा सामने देखते रहो, मिथ्या विषयों का प्रेम हृदय से हटा दो ।
साचे को साचा कहै, झूठे को झूठा ।
दादू दुविधा को नहीं, ज्यों था त्यों दीठा ॥२४॥
जो सँत सत्य परब्रह्म को सत्य और मिथ्या मायिक प्रपँच को मिथ्या कहते हैं, उन्होंने जैसा ब्रह्म था, वैसा ही देख लिया है,अत: उनके हृदय में भ्रांति रूप कोई भी दुविधा नहीं रही । 
(क्रमशः)

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