शनिवार, 8 दिसंबर 2018

= पारिख का अँग(२७ - २८/३०) =



॥ दादूराम सत्यराम ॥ 
*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
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*पारिख का अँग २७* 
कर्त्ता कसौटी 
खोटा खरा परखिये, दादू कस कस लेय । 
साचा है सो राखिये, झूठा रहण न देय ॥२८॥ 
२८ में कहते हैं, ईश्वर भी भक्त की परीक्षा करते हैं, बुरे - भले की परीक्षा अवश्य करनी चाहिए । ईश्वर भी बारँबार परीक्षा करके सच्चे भक्त को ही अपनाते हैं और झूठे को भक्तों की गणना में नहीं रहने देते । अत: जो सच्चा साधक हो, उसे ही पास रखना चाहिए । 
पारिख अपारिख 
खोटा खरा कर देवे पारिख, तो कैसे बन आये । 
खरे खोटे का न्याय नबेरे१, साहिब के मन भावे ॥२९॥ 
२९ - ३० में परीक्षक अपरीक्षक के विषय में कहते हैं, मिथ्या मायिक प्रपँच वाले तथा दँभी भक्त की परीक्षा करके उसे कोई परीक्षक सच्चा बता दे तो वह परीक्षा यथार्थ कैसे मानी जायेगी ? सच्चे को सच्चा और मिथ्या को मिथ्या कह कर परीक्षा रूप न्याय पूरा१ किया जाय, तभी वह न्याय भगवान् के मन को प्रिय लगता है । 
दादू जिन्हैं ज्यों कही तिन्हैं त्यों मानी, ज्ञान विचार न कीन्हा । 
खोटा खरा जीव परख न जाने, झूठ साच कर लीन्हा ॥३०॥ 
स्वार्थपरायण वक्ताओं ने जिन अज्ञानियों को जैसा कहा, उनने वैसा ही मान लिया । बुद्धिहीन होने से वे सुने हुये ज्ञान की यथार्थता वो अयथार्थता का विचार नहीं कर सके और स्वयँ बुरे भले की परीक्षा अपने मन से करना जानते नहीं । अत: ऐसे लोगों ने मिथ्या मायिक प्रपँच की वस्तुओं को ही सत्य मान कर उपास्य रूप से धारण कर लिया । 
(क्रमशः)

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