गुरुवार, 31 जनवरी 2019

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू सो साहब जनि विसरै, जिन घट दिया जीव ।*
*गर्भवास में राखिया, पालै पोषै पीव ॥* 
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साभार ~ Vinki Vikram Verma

फकीर हुआ एक सूफी बायजीद। यात्रा पर जा रहा था तीर्थ की, हज करने जा रहा था। सस्ते जमाने थे; एक पैसे में एक दिन का भोजन और एक दिन का खर्च पूरा हो जाता था। तो उसने एक पैसा जेब में रखा लिया और यात्रा पर निकलने को ही था उसके एक धनपति भक्त ने कहा कि यह तुम क्या कर रहे हो? एक पैसा लेकर हज करने जा रहे हो, कभी सुना? वह साथ में एक थैली ले आया था, जिसमें बहुत अशरफियां थीं। उसने कहा, ये साथ में रख लो। एक पैसे से कहीं हज हुई है ! इतनी लंबी यात्रा, आना—जाना, कम से कम छह महीने लगनेवाले हैं। 
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बायजीद ने कहा, रख लूंगा तुम्हारी थैली भी, लेकिन तुम मुझे पहले पक्का भरोसा दिला दो कि मैं एक दिन से ज्यादा जियूंगा? कल भी मैं रहूंगा। अगर तुम मुझे आश्वासन दे दो कि कल भी मैं रहूंगा, तुम्हारी थैली स्वीकार !
तो उस धनपति ने कहा, मैं कैसे आश्वासन दे सकता हूं कि कल आप रहेंगे? कल का किसको भरोसा है! तो बायजीद ने कहा, यह एक पैसा आज के लिए काफी है। कल का जब भरोसा ही नहीं तो कल का इंतजाम...।
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बायजीद की भीड़ में एक फकीर और बैठा हुआ था। बायजीद तब ज्ञान को उपलब्ध नहीं हुआ था, लेकिन फिर भी ज्ञान के करीब ही करीब रहा होगा, ठीक कगार पर रहा होगा; अभी छलांग नहीं लग गयी थी। तभी तो हज की यात्रा को जा रहा था। कहीं ज्ञानी तीर्थयात्रा को गए हैं ! मगर फिर भी समझ गहरी थी, तब तो धनपति के पैसे को कह दिया कि सम्हालकर रख लो, तुम्हारे काम पड़ेगा। मुझे तो कल का भरोसा कोई दिलाये तभी कल कि चिंता हो।
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एक फकीर हंसने लगा और भीड़ से उठ गया। बायजीद उसके पीछे दौड़ा और कहा कि तुम हंसे क्यों? उसने कहा, जब एक दिन का भरोसा है तो कल के भरोसे में क्या दिक्कत है? जब एक पैसा रख सकते हो, तो बात तो हो गई। फिर एक पैसा रखो कि करोड़ पैसा रखो, क्या फर्क पड़ता है? आज का भरोसा है? और जब एक पैसे पर भरोसा है तो परमात्मा पर कितना भरोसा है? है ही नहीं ! 

*बायजीद ने वह पैसा भी वहीं गिरा दिया। और कहते हैं, उस पैसे के गिरने के साथ बायजीद ज्ञान को उपलब्ध हुआ।* 
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एक क्षण का भरोसा नहीं, और इंतजाम कितना बड़ा ! इंतजाम करते—करते ही तुम समाप्त हो जाओगे। पैसा, धन तो पेट्रोल की भांति है; वह कोई मंजिल नहीं है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं कि वे पेट्रोल इकट्ठा करते चले जाते हैं। उनके घर में पेट्रोल हो जाता है। खुद भी रहने की जगह नहीं रह जाती, वे बाहर हरते हैं। वे यात्रा की तैयारी कर रहे हैं; क्योंकि जब तैयारी पूरी हो जाए तो यात्रा पर जाएंगे ! इस संसार में कोई चीज कभी पूरी नहीं होती, इसलिए वह कभी यात्रा पर नहीं जा पाते। वे पेट्रोल इकट्ठा करते—करते मर जाते हैं।
🌹ओशो🌹
सुन भई साधो--(प्रवचन--09)

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