गुरुवार, 31 जनवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१५.राग सिंधूड़ो - ३/१) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १५.राग सिंधूड़ो =*
(३/१)
*द्वै दल आइ जुडे धरणी पर बिच सिंधूडौ बाजै रे ।* 
*एक वोर कौं नृप बिबेक चढि एक मोह नृप गाजै रे ॥टेक॥*
*प्रथम काम रन मांहिं गल्यारौ को हम ऊपरि आवै रे ।*
*महादेव सरिषा मैं जीत्या नर की कौंन चलावै रे ॥१॥*
*आइ बिचार बोलियो बांणी मुष पर नीकैं डाट्यौ रे ।*
*ज्ञान षडग ले तुरत काम कौं हाथ पकडि सिर काट्यौ रे ॥२॥*
*क्रोध आइ बोल्यौ रन मांहीं हौं सबहिन कौ काला रे ।*
*देव दयंत मनुष पशु पंषी जरैं हमारी ज्वाला रे ॥३॥* 
एक आध्यात्मिक युद्ध का विवरण - रणभूमि में योद्धाओं के दो दल एकत्र हो गये । मध्य में युद्ध के बाजे बजने लगे । वहाँ एक पक्ष में विवेक था दूसरे पक्ष में मोह हुंकार भर रहा था ॥टेक॥ 
वहाँ सर्वप्रथम कामदेव रण में आकर यह गर्जना करने लगा - ‘हम पर कौन आक्रमण करने का साहस कर रहा है । अरे ! हमने महादेव के तुल्य वीर देवताओं को भी युद्ध में पराजित किया है - तब हमारे सामने किसी मनुष्य की तो गणना ही क्या है ! ॥१॥’ 
तब वहाँ विचार ने उस को धमकाते हुए सीधे डांट दिया और ज्ञान रूप तलवार से तत्काल ही उस(कामदेव) का सिर भी पृथक कर दिया ॥२॥(क) 
उसी समय क्रोध अपने भयंकर रूप में प्रकट होकर कहने लगा - “मैं सब का काल(मृत्यु) हूँ । इस लोक में जितने भी देव, दैत्य, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि प्राणी हैं वे सभी मेरी ज्वाला से जल रहे हैं ॥३॥”
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें