रविवार, 27 जनवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१५.राग सिंधूड़ो - १/१) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १५.राग सिंधूड़ो =*
(१/१) 
*दादू सूर सुभट दलथम्भण रोपि रह्यौ रन माहीं रे ।* 
*जाकी साषि सकल जग बोलै टेक टली कहुं नाहीं रे ॥(टेक)* 
*ऐसी मार करै बाणन की जिहिं लागै सो जाणैं रे ।* 
*माता पूत एक ही जायौ बैरी बहुत बषाणैं रे ॥१॥* 
*हाक सुणैं तैं हीयौ फाटै सनमुष कोइ न आवै रे ।* 
*जहां पडै तहां टूक टूक करि अति घमसांण मचावै रे ॥२॥* 
महाराज श्रीदादूदयालजी आध्यात्मिक युद्ध में ऐसे ध्वजारोपी योद्धा थे जिनकी वीरता का लोहा आध्यात्मिक जगत् में आज भी सब लोग मानते हैं । हमने इस विषय में लघुतम अपवाद भी कहीं नहीं सुना ॥टेक॥ 
वे जिज्ञासु का रागादि मिटाने के लिए ऐसा युक्तिपूर्ण उपदेश करते हैं कि उसका खण्डन करने का साहस कोई भी विद्वान नहीं कर सकता । उनके उपदेश की गम्भीरता वही समझ सकता है जिसे वह किया जाता है । ऐसा सत्योदेशक उनके माता पिता ने एक उनको ही उत्पन्न किया है । भले ही उनके विरोधी उनके विषय में कुछ भी कहते रहें ॥१॥ 
उनके द्वारा कृत उपदेशमयी गर्जना सुनकर विरोधियों का हृदय धड़कने लगता है, अत: उनके सामने आकर आध्यात्मिक चर्चा करने का कोई साहस नहीं करता । उनका उपदेश घोर(अच्छे से अच्छे) नास्तिकों के कठोर हृदयों को भी द्रवित कर देता है ॥२॥
(क्रमशः)

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