सोमवार, 28 जनवरी 2019

= सुन्दरी का अँग(३०-१३/१५) =

#daduji

॥ दादूराम सत्यराम ॥

*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*सुन्दरी का अँग*
सखी सुहागिनि सब कहैं, हूं री१ दूहागिनि आहि ।
पिव का महल न पाइये, कहां पुकारूँ जाइ ॥१३॥
हे सँत - सखी ! मुझे सभी लोग कहते हैं, इसे परमात्मा - पति प्राप्त है । अरी१, मुझे वह प्राप्त नहीं है । मुझे उस परमात्मा का समाधि रूप महल भी नहीं मिल रहा है । यदि दर्शनार्थ प्रार्थना भी करूँ, तो कहां जाकर करूँ ?
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सखी सुहागिनि सब कहैं, कंत न बूझे बात ।
मनसा वाचा कर्मणा, मूर्च्छ मूर्च्छ जिव जात ॥१४॥
सँत - सखी ! मुझे सभी कहते हैं, इसे परमात्मा प्राप्त है, किन्तु परमात्मा तो हमारे सुख दु:ख की बात भी नहीं पूछते । हम मन - वचन - कर्म से सत्य ही कहते हैं, उनके दर्शन के लिये हमारा मन बारँबार मूर्च्छित हो जाता है ।
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सखी सुहागिनि सब कहैं, पिव सौं परस न होइ ।
निशवासर दुख पाइये,यहु व्यथा न जाने कोइ ॥१५॥
सँत - सखी ! मुझे सब कहते हैं, इसे परमात्मा प्राप्त है, किन्तु परमात्मा से मिलन तो होता ही नहीं । उससे मिलने के लिए रात्रि - दिन वियोग जन्य क्लेश पा रही हूं । यह हमारी व्यथा कोई भी नहीं जानता ।
(क्रमशः)

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