गुरुवार, 31 जनवरी 2019

= *परिचय भोले भाव का अंग ६०(५/९)* =

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卐 सत्यराम सा 卐
*दादू जे जे चित बसै, सोई सोई आवै चीति ।*
*बाहर भीतर देखिये, जाही सेती प्रीति ॥* 
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**श्री रज्जबवाणी**
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
साभार विद्युत् संस्करण ~ Tapasvi Ram Gopal
**परिचय भोले भाव का अंग ६०**
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देखो ध्रुव नामा प्रहलाद, बाल समय पाई तिन दाद१ । 
भोले नाम लिये सब नाखी२, वेद भेद३ में नजर न राखी ॥५॥ 
देखो, ध्रुव, नामदेव और प्रहलाद ने बालकपन में ही प्रशंसा१ प्राप्त करली थी उन भोले भक्तों ने सब कुछ त्याग कर२ नाम चिन्तन ही किया था, वेद के रहस्य३ में अपनी रूचि नहीं रखी थी । 
परिचय भोले भाव का, परिचय१ करै सहाय । 
परिचय परस बिना दरस, परिचय रहै समाय ॥६॥ 
भोले भाव वाले भक्त का भगवान से परिचय हो जाता है तब भगवान प्रत्यक्ष१ होकर उसकी सहायता करते हैं, परिचय होने पर बिना स्पर्श के ही आत्मस्वरूप से दर्शन होते रहते हैं परिचय होने पर भक्त प्रभु में ही समा जाता है अलग नहीं रहता । 
कौंण गुणहुं सौं नाम संवारे१, किहिं विधि भई मिठाई । 
सो समझे बिन शक्ति घटी२, कछु जिन प्राणिहु ले खाई ॥७॥ 
कौंन से गुणों से इस मिठाई का अमुक नाम रखा१ गया है और किस रीति से यह बनाई गई है, सो सब बात समझे बिना भी जिस प्राणी ने खाई है, उसके लिये उसकी स्वादु शक्ति कुछ कम२ हो जाती है क्या ? अर्थात नहीं होती, वैसे ही दर्शन पद्धति से परब्रह्म के स्वरूप का निर्णय करे बिना भी भजन द्वारा ज्ञान होकर ब्रह्म का साक्षात्कार होने पर उसके आनन्द में कुछ कमी रहती है क्या ? अर्थात नहीं रहती । 
नाम भेद गुण कछू न जाने, भोले भाव सु लीन । 
तिन सौं बाबे बेर न लाई, जो माँज्ञा सो दीन ॥८॥ 
जिन भोले भक्तों ने प्रभु के नाम भेद वा गुण कुछ भी ना समझे केवल प्रेम से ही उसके चिन्तन में लीन रहे, उनको दर्शन देने में प्रभु ने देर नहीं लगाई और जो भी मांगा वही उन्हें दिया है, यह इतिहास पुराणों में तथा भक्तमालों में प्रसिद्ध है । 
पात्रों में पाणी जम्या, पात्रों के उनहार । 
तैसे रज्जब प्राणपति, भाव भजन वपु धार ॥९॥ 
जल पात्रों में शीत से जल जमता है तब पात्रों के अनुसार ही चौड़ा - लम्बा जमता है, वैसे ही प्राणपति प्रभु भोले भक्तों के भाव और भजन के अनुसार ही शरीर धारण करके उन्हें संतुष्ट करते हैं ।
इति श्री रज्जब गिरार्थ प्रकाशिका सहित परिचय भोले भाव का अंग ६० समाप्त ॥ सा. १९३८॥ 
(क्रमशः)

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