गुरुवार, 31 जनवरी 2019

= सुन्दरी का अँग(३०-२२/२४) =

#daduji
॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू अनुभव वाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
*सुन्दरी का अँग*
.
नदिया नीर उलँघ कर, दरिया पैली पार ।
दादू सुन्दरि सो भली, जाय मिले भरतार ॥२२॥ 

आशा - नदी के विषय - मनोरथ - जल को उल्लँघन करके तथा सँसार - समुद्र के पार जाकर, परमात्मा रूप अपने स्वामी को मिलती है, वही सँत - सुन्दरी श्रेष्ठ है ।

*सुन्दरी सुहाग* 
प्रेम लहर गह ले गई, अपने प्रीतम पास । 
आत्मा सुन्दरि पीव को, विलसे दादू दास ॥२३॥ 
२३ - २७ में सँत - सुन्दरी का सौभाग्य दिखा रहे हैं, प्रेम - समुद्र की अनन्यावस्था रूप लहरें हमारी आत्म - सुन्दरी की वृत्ति को विषय रूप तट से पकड़ कर अपने प्रियतम परमात्मा के पास ले गई है । अत: अब वह परमात्मा से निरन्तर साक्षात्कार करके परम आनन्द का उपभोग कर रही है । 

सुन्दरि को सांई मिल्या, पाया सेज सुहाग । 
पिव सौं खेले प्रेम रस, दादू मोटे भाग ॥२४॥ 
आत्मा - सुन्दरी को परमात्मा की प्राप्ति हुई । अब वह हृदय - शय्या पर प्रभु की उपस्थिति रूप सौभाग्य युक्त होकर अपने स्वामी परमात्मा से अरस - परस रूप खेल खेलती हुई प्रेम - रस का पान करती है । यह उसके महान् सौ भाग्य का ही फल है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें