बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१६.राग सोरठ - ८/२) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १६. राग सोरठ =*
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(८/२) 
*किनहूं लइ औषध मूरी,* 
*किनहूं केसर कस्तूरी ।* 
*किनहूं लियौ बहुत अनाजा,* 
*किनहूं लियौ ल्हसण प्याजा ॥३॥* 
*संतनि लीयौ हरि हीरा,* 
*तिनस्यौं कीयौ हम सीरा ।* 
*दुःख दालिद्र निकट न आवै,* 
*यौं सुन्दर बनिया गावै ॥४॥* 
किसी ने स्वरोग शान्त्यर्थ औषध(जड़ी बूटी) खरीदी । किसी ने केशर या कस्तूरी ही खरीदी किसी ने बहुत सा अन्न खरीदा तो किसी ने अपने लिए लहसुन एवं प्याज ही खरीदा ॥३॥ 
परन्तु जो सन्त थे, उन ने हमसे रामरूप हीरा खरीदा । उनसे हमने अपना मेल जोड़ बढाया । तब से हमारे सामने दुःख एवं दरिद्रता की कोई समस्या नहीं रह गयी । ऐसा इस बनिया(व्यापारी) सुन्दरदास का कथन है ॥४॥
(क्रमशः)

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