शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१६.राग सोरठ - ६/२) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १६. राग सोरठ =*
.
(६/२) 
*सो अवधू गुरु का पूरा, जिनि एक किया ससि सूरा ।* 
*अभि अंतरि जोति जगावै, तहां उनमनि ताली लावै ॥३॥* 
*यह गंग जमुन बिचि षेला, तहां परम पुरुष का मेला ।* 
*गुरु दादू दिया दिषाई, तहां सुंदर रह्या समाई ॥४॥* 
जो साधक गुरु का अतिशय प्रिय है, जिसने इडा एवं पिंगला को पूर्णतः सिद्ध कर लिया है, जिसकी अन्तर्ज्योति जाग्रत् हो गयी है, वही योगी उन्मनी अवस्था तक साधना कर सकता है ॥३॥ 
यह सब वाम एवं दक्षिण स्वरों का क्रिया कौशल है । यही परमपुरुष का मिलन हो पाता है । मेरे सर्वसमर्थ गुरुदेव श्रीदादूदयाल ने यह साक्षात्कार की स्थिति बनायी है । इसी स्थिति में बैठ कर श्रीसुन्दरदासजी ब्रह्मसाधना करते हैं ॥४॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें