मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

= सुन्दर पदावली(१६.राग सोरठ - ८/१) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= १६. राग सोरठ =*
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(८/१) 
*देषहु साह रमइया ऐसा,*
*सो रहै अपरछन बैसा ॥टेक॥* 
*यहु हाट कियौ संसारा,*
*तामैं बिबिधि भांति ब्यौपारा ।* 
*सब जीव सौदागर आया,*
*जिनि बनज्या तैसा पाया ॥१॥* 
*किनहूं बनिजी षलि षारी,*
*किनहुं लइ लौंग सुपारी ।* 
*किनहूं लिये मूंगा मोती,*
*किनहूं लइ काच की पोती ॥२॥* 
ऐसे राम व्यापारी से साक्षात्कार करना चाहिये ॥टेक॥ 
यह संसार एक प्रकार की दुकान ही है । इसमें नाना प्रकार के व्यापार होते हैं । सभी प्राणी यहाँ अपनी अभीष्ट वस्तु खरीदने आते हैं । जिन ने जैसा मूल्य दिया उतने मूल्य की वस्तु उन ने प्राप्त की ॥१॥ 
किसी ने खाद एवं खल ख़रीदा तो किसी ने लौंग एवं सुपारी खरीदी । किसी ने मूंगा एवं मोती आदि रत्न ही खरीदे और किसी ने मुंह देखने के लिये शीशा(दर्पण) खरीदा ॥२॥ 
(क्रमशः)

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