शुक्रवार, 14 जून 2019

= बेली का अँग ३६(४-६) =

#daduji


॥ दादूराम सत्यराम ॥ 
*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*बेली का अँग ३६*
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दादू बेली आत्मा, सहज फूल फल होइ ।
सहज सहज सतगुरु कहै, बूझे बिरला कोइ ॥४॥
उक्त प्रकार साधन द्वारा जीवात्मा रूप बेलि को अनायास ही भक्ति - फूल और ज्ञान - फल प्राप्त होता है । सद्गुरु इस पद्धति को कहते रहते हैं किन्तु कोई विरला साधक ही शनै:शनै: समझ पाता है ।
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जे साहिब सींचे नहीं, तो बेली कुम्हलाइ ।
दादू सींचे साँइयां, तो बेली बधती जाइ ॥५॥
यदि परमात्मा जीवात्मा - बेली को अपने अनुग्रह - जल से न सींचे तो वह कुम्हला जाती है अर्थात् पतन की ओर जाती है और यदि वे सींचते रहें तो भक्ति - ज्ञानादि द्वारा बढ़ती जाती है ।
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हरि तरुवर तत आत्मा, बेली कर विस्तार ।
दादू लागे अमर फल, कोई साधू सींचनहार ॥६॥
यदि कोई सँत तत्व ज्ञान द्वारा सींचने वाला हो तो परमात्मा रूप श्रेष्ठ वृक्ष के आश्रय से जीवात्मा - बेलि अपना विस्तार कर लेती है और उसके अमरता देने वाला ब्रह्म ज्ञान रूप फल लग जाता है ।
(क्रमशः)

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