#daduji
॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू अनुभव वाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*विनती का अँग ३४*
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साहिब सौं मिल खेलते, होता प्रेम सनेह ।
परकट१ दर्शन देखते, दादू सुखिया देह ॥७८॥
यदि हमारा भगवत् में अनन्य प्रेम होता और भगवान् का भी हम में स्नेह होता तो हम प्रत्यक्ष१ में उनके दर्शन करते हुये ब्रह्मानन्द प्राप्ति रूप खेल खेलते और हमारा जीवात्मा परम सुख को प्राप्त हो जाता ।
(क्रमशः)

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