शनिवार, 22 जून 2019

= अबिहड़ का अँग ३७(७-९) =

#daduji

॥ दादूराम सत्यराम ॥ 

*श्री दादू अनुभव वाणी* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
*अबिहड़ का अँग ३७*
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दादू अबिहड़ आप है, साचा सिरजनहार । 
आदि अंत बिहड़े नहीं, बिनसै सब आकार ॥७॥
विनाशी होने से सभी आकारों का वियोग होता है, किन्तु सत्य निराकार सृष्टिकर्ता परमेश्वर का सृष्टि के आदि से अन्त तक कभी भी किसी से वियोग नहीं होता, अत: व्यापक होने से स्वयँ ब्रह्म ही सदा सबके साथ सँयोग वाला है ।
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दादू अबिहड़ आप है, अविचल रह्या समाइ ।
निहचल रमता राम है, जो दीसै सो जाइ ॥८॥
जो नाम रूपात्मक कार्य है, वे सब नष्ट हो जायेंगे, निश्चल तो एक सब में रमने वाला राम ही है और वह अचल होकर सब में परिपूर्ण है । अत: स्वयँ ब्रह्म ही सदा साथ रहने वाला है ।
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दादू अबिहड़ आप है, कबहूं बिहड़ै नाँहिं ।
घटै बधै नहिं एक रस, सब उपज खपै उस माँहिं ॥९॥
स्वयँ ब्रह्म ही सदा सबके साथ रहते हैं, कभी भी किसी से अलग नहीं होते । सदा एक रस रहते हैं, घटते बढ़ते नहीं । अन्य सब मायिक सँसार उन्हीं में जल के बुदबुदे की तरह उत्पन्न होकर लय होता रहता है ।
(क्रमशः)

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