#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*अब हम गये राम(जी) कै सरनैं ।*
*वा बिन और नहीं कोइ संम्रथ*
*मेटै जामन मरनैं ॥(टेक)*
*भटकत फिरे बहुत दिन तांई,*
*कहूं न पार उतरनैं ।*
*आन देव की सेवा करि करि,*
*लागै बहुत हिंजरनैं ॥१॥*
*काहू ऊपरि कियौ बहुत हठ,*
*काहू ऊपर धरनैं ।*
*दीजै दोष करम अपनै कौ,*
*वै दिन यौं ही भरनैं ॥२॥*
अब हम प्रभु(राम) की शरण में पहुँच गये हैं, क्योंकि उनके बिना अन्य कोई ऐसा नहीं है जो संसार में हमारी जन्म मरण परम्परा को विनष्ट कर पाये ॥टेक॥
हम बहुत दिन तक इधर उधर भटके, कहीं भी इस संसार सागर से पार जाने का मार्ग नहीं मिला । अन्य देवों की निरर्थक सेवा करते हुए हमने पश्चाताप ही किया ॥१॥
किसी मार्ग द्वारा उसकी प्राप्ति में हमने बहुत हठ किया, किसी मार्ग की उपेक्षा की । इस सब दौड़ धूप के लिये किसको दोष दिया जाय । इसी प्रकार, वह बहुत सा समय व्यर्थ नष्ट हो गया ॥२॥
(क्रमशः)

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