शुक्रवार, 28 जून 2019

= पद २ =

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*श्री दादू अनुभव वाणी, द्वितीय भाग : शब्द* 
*राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
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२ - अन्य उपदेश । त्रिताल 
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राम नाम जनि१ छाड़े कोई, 
राम कहत जन निर्मल होई ॥टेक॥ 
राम कहत सुख सँपति सार, 
राम नाम तिर लँघै पार ॥१॥ 
राम कहत सुधि बुधि मति पाई, 
राम नाम जनि छाडहु भाई ॥२॥ 
राम कहत जन निर्मल होई, 
राम नाम कह कश्मल२ धोई ॥३॥ 
राम कहत को को नहिं तारे, 
यहु तत दादू प्राण हमारे ॥४॥ 
नाम स्मरण का उपदेश कर रहे हैं - हे भाइयो ! राम नाम का स्मरण किसी को भी नहीं१ त्यागना चाहिए । राम - नाम चिन्तन से प्राणी निष्पाप होता है, श्रेष्ठ सुख सम्पत्ति मिलती है, बुद्धि को शुद्ध ज्ञान प्राप्त होता है, हृदय के कामादिक दोष२ हटते हैं; मन का मोह नष्ट होता है और प्राणी सँसार - समुद्र को तैर कर पार चला जाता है । कहो ? राम - नाम से किस - किस का उद्धार नहीं हुआ ? सभी का हुआ है । यह राम - नाम स्मरण रूप तत्व हमारे प्राणों का तो आधार ही है । 
(क्रमशः)

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