बुधवार, 26 जून 2019

= सुन्दर पदावली(२४. राग काफी - २/३) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*तुम जिनि जानौं है बिभचारनि,*
*हौं पतिबरता नारि ।* 
*और पुरुष भईया सब मेरे,*
*यह तुम लेहु बिचारि ॥६॥* 
*सुरति कोकिला रसना चातक,*
*पिव पिव करत बिहाइ ।* 
*नैंन चकोर भये मेरे प्यारे,*
*निश दिन निरषत जाइ ॥७॥* 
*अब मोहि दोष कछू नहिं लागै,*
*सुनियौ दोऊ कान ।* 
*सुन्दर बिरहनि कहत पुकारै,*
*तुरत तजौंगी प्रान ॥८॥* 
आप मुझको व्यभिचारिणी स्त्री न समझ लेना, मैंने एकान्ततः आपके लिये पतिव्रत धर्म के पालन का नियम ले रखा है । संसार के अन्य सभी पुरुष मेरे भाई के समान हैं । ऐसा निश्चय मेरे लिये आप दृढ़ता से रखें ॥६॥ 
मेरी सुरति कोयल के समान तथा जिह्वा चातक के समान दिन रात आपका नाम रटती रहती है । प्रियतम ! मेरे नेत्रों ने भी चकोर का स्वाभाव ग्रहण कर लिया है कि वे भी आपके दर्शन की प्रतीक्षा में लगे रहते हैं ॥७॥ 
अब मुझे दोष न देना, आप अपने दोनों कान खोल कर सुन लें कि मैं अब आपके बिना तत्काल प्राण त्याग दूँगी ॥८॥
(क्रमशः)

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