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🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*दादू मुझ ही मांही मैं रहूँ, मैं मेरा घरबार ।*
*मुझ ही मांही मैं बसूँ, आप कहै करतार ॥*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*##### एकान्त और अकेलापन #####*
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अकेलापन इस संसार की सबसे बड़ी सजा है और एकान्त इस संसार में सबसे बड़ा वरदान है । इन दो समानार्थी लगने वाले शब्दों में आकाश पाताल का अन्तर है ।
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अकेलेपन में छटपटाहट है, तो एकान्त में आराम है । अकेलेपन में घबराहट है तो एकान्त में शान्ति । जब तक हमारी नजर बाहर की ओर है, तब तक हम अकेलापन महसूस करते हैं और जैसे ही नजर भीतर की ओर मुड़ती है, तो एकान्त का अनुभव होने लगता है । ये जीवन और कुछ नहीं, वस्तुत: अकेलेपन से एकान्त की ओर एक यात्रा ही है । ऐसी यात्रा जिसमें रास्ता भी हम ही हैं, राही भी हम हैं और मंजिल भी हम ही हैं ।
#### संस्कार बिन्दु पत्रिका द्वारा सम्पादिक सँभरलेक जयपुर ।
------ सत्यराम सा

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