मंगलवार, 18 जून 2019

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
*अपना पराया खाइ विष, देखत ही मर जाय ।*
*दादू को जीवै नहीं, इहि भोरे जनि खाय ॥*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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###### श्री गोरखवाणी ######
बजरी करता अमरी राषै, अमरी करंतां बाई ।
भोग करंतां जे ब्यंद राषै, ते गोरष का गुरभाई ॥१४१॥
गोरखनाथजी के पूर्वकाल में वाममार्गी साधना का बहुत प्रचार प्रसार था । वामाचारी वज्रोली तथा अमरोली क्रियाओं के नाम पर व्यभिचार में लगे रहते थे । वे साधकों का इन पतनोन्मुखी आचारों से बचने का आह्वान करते हैं । 
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वे कहते हैं - भोगासक्त व्यक्ति द्वारा बिंदु की रक्षा की कल्पना करना बांरा जल के पृथ्वी पर न गिरकर उल्टा बादलों की ओर जाने की आशा करने जैसा ही है । यदि ऐसा कोई कर पाता है तो मैं उसे अपने समान मानने को तैयार हूँ ।
#### संस्कार बिन्दु पत्रिका द्वारा प्रकाशित सँभरलेक जयपुर ॥
------ सत्यराम सा

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