#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*चोवा चन्दन केसरि कुम कुम,*
*उडत गुलाल अबीर ।*
*हौं तुम बिन मेरे प्रान पियारे,*
*कैसैं कैं राषौं धीर ॥३॥*
*बाजत चङ्ग उपंग पषावज,*
*राइ गिरगिरी ढोल ।*
*सुनि सुनि बिरहनि के मन महिया,*
*सालत तब के बोल ॥४॥*
*बार बार मोहि बिरह सतावै,*
*कल न परत पल एक ।*
*कहि जु गये ते बेगि मिलन की,*
*बीते दिवस अनेक ॥५॥*
यहाँ स्थान स्थान पर चन्दन, चौवा, केसर, कुमकुम, गुलाल एवं अबीर उड़ रहा है, परन्तु हे प्राणपति ! मैं आपके बिना कैसे धैर्य रखूं ॥३॥
आज घर घर में चंग, मृदंग, पखावज, राइ, गिरगिरी(प्राचीन सारंगी वाद्यविशेष), ढोल आदि के शब्द सुन सुनकर विरहिन के हृदय को कष्ट ही दे रहे हैं ॥४॥
आप का वियोग मुझे बहुत सता रहा है । एक क्षण भी शान्ति नहीं मिल रही है । आप तो जाते समय शीघ्र ही आने की बात कह गये थे । अब तो उस बात को भी बहुत समय बीत गया है ॥५॥
(क्रमशः)

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