#daduji
॥ दादूराम सत्यराम ॥
*श्री दादू अनुभव वाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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*अबिहड़ का अँग ३७*
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संगी सोई कीजिये, सुख दुख का साथी ।
दादू जीवन - मरण का, सो सदा संगाती ॥४॥
जो सुख दु:ख में साथ देने वाला हो, जीवन काल और मरने के पश्चात् भी सदा संग रह सकता हो, उसी को अपना साथी बनाओ ।
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दादू संगी सोई कीजिये, जे कबहूं पलट न जाइ ।
आदि अंत बिहड़ै नहीं, तासन यहु मन लाइ ॥५॥
जिसमें बाल - युवादि काल - जन्य परिवर्तन कभी भी नहीं होते और जो सृष्टि के आदि काल से प्रलय पर्यन्त किसी से भी अलग नहीं होता, उसी परमेश्वर को अपना साथी बनाकर, यह मन उसी में लगाओ ।
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दादू अबिहड़ आप है, अमर उपावनहार ।
अविनाशी आपै रहे, बिनसे सब सँसार ॥६॥
६ - १० में नित्य साथ रहने वाले ब्रह्म - तत्व का परिचय दे रहे हैं - सब सँसार नष्ट होता है, सँसार को उत्पन्न करने वाले अविनाशी परमात्मा, साधनादि उपाय बिना, अपने आप ही अमर रहते हैं । अत: सबके साथ नित्य सँयोग स्वयँ ब्रह्म का ही रहता है, अन्य का नहीं ।
(क्रमशः)

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