गुरुवार, 11 जुलाई 2019

= सुन्दर पदावली(२४. राग काफी - ७/३) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 

*जोगनि होइ रही जग मोहन कारनै ।* 
*तुम काहे न दरसन देहु करौं तन बारनै ॥६॥* 
*मेरौ षून षता अब कौंन कहौं किन रावरे ।* 
*तेरी सूरति की बलि जाउं मेरे गृह आवरे ॥७॥*
*सुन्दर बिरहनि के पीव गहर न लाइये ।* 
*मोहि मिहरि मया करि बेगि दरस दिषाइये ॥८॥* 
हे जगमोहन ! अब में, आपके लिये, जोगिन(वैरागिन) बन गयी हूँ । आप मुझे दर्शन क्यों नहीं देते ! मैं आप पर अपना यह शरीर न्योछावर कर दूँगी ॥६॥ 
ओ मेरे राजा ! मैं अब अपना अपराध किससे कहूँ ? आप पर मैं बलिहारी जाती हूँ, आप मेरे घर पधारिये ॥७॥ 
हे मुझ विरहिणी के पतिदेव ! मुझ पर इतनी कठोरता न दिखाइये । अपितु, मुझ पर दया दिखाते हुए मुझ को शीघ्र ही दर्शन दीजिये ॥८॥ 
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें