卐 सत्यराम सा 卐
*दादू राम अगाध है, परिमित नाहीं पार ।*
*अवर्ण वर्ण न जाणिये, दादू नाम अधार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
नाम कौन सा स्मरण करना चाहिये ?
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सभी नाम सम फलद है, मन भावे सो गाय ।
इक साधक के प्रश्न पर, दादू यही सुनाय ॥८४॥
संतवर दादूजी से एक साधक ने प्रश्न किया - "भगवन ! कौन सा नाम स्मरण करना चाहिये ?
दादूजी बोले -
"दादू सिरजनहार के, केते नाम अनन्त ।
चित आवे सो लीजिये, यूं साधू सुमरे संत ॥"
अर्थात भगवान के नाम अनन्त हैं । सब का ही अंतिम फल भगवत् प्राप्ति है । इस लिये चित आवे(मन भावे) वही नाम स्मरण करना चाहिये । अथवा चित आवे ? (जो अपने गुरु ने बताया हो)सोई स्मरण करना चाहिये । नामों में भेद मानना योग्य नहीं ।
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
######## सत्य राम सा

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