रविवार, 1 सितंबर 2019

= सुन्दर पदावली(२६. राग संकराभरन - १/१) =

#daduji

॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
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*मन कौंन सौं जाइ अटक्यौ रे ।*
*ऐसैं बंध्यौ छोर्यौ न छूटै* 
*कैउक बरियां झटक्यौ रे ॥(टेक)* 
*जाही दिश तूं भ्रमतौ ही आयौ* 
*ताही दिश कौं लटक्यौ रे ॥१॥* 
अरे मेरे मन तूं कहाँ जाकर बन्ध गया । मैंने अनेक बार तुझ को वहाँ से छुड़ाने का प्रयास भी किया, परन्तु तूँ वहाँ से छूटता ही नहीं है ॥टेक॥
जिस मार्ग से तूँ यहाँ तक भटकता हुआ आया था, वही मार्ग तूने पुनः पकड़ लिया है ॥१॥
(क्रमशः)

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