सोमवार, 2 सितंबर 2019

= १२ =

卐 सत्यराम सा 卐
*माधइयो-माधइयो मीठो री माइ,*
*माहवो-माहवो भेटियो आइ ॥*
*कान्हइयो-कान्हइयो करता जाइ,*
*केशवो केशवो केशवो धाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद्यांश. २८४)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*नाम जप का प्रत्यक्ष फल -*
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नाम जाप का प्रत्यक्ष फल, कहीं सु देखा जाय ।
बचे विभूती सहज ही, माधव में मन लाय ॥१४४॥
कलकत्ते की बात है, विभूतिभूषण के मास्टर प्राय: लड़कों को बहुत पीटा करते थे और अपनी जाति वालों को दूसरों से दूना पीटते थे । विभूति भूषण और उनके एक भतीजे मास्टर की जाति के थे । भतीजे को चौगुना पीटा जाता था । 
विभूतिभूषण पढने में अच्छे थे । अपना पाठ प्रतिदिन याद कर ही लिया करते थे । किन्तु एक दिन उनसे भी प्रमाद हुआ । मास्टर एक एक लड़के से पाठ पूछते हुये और गलती पर उन्हें पीटते हुये आ रहे थे । विभूति भूषण डर गये और उन्हे याद आया कि विपत्ति में भगवान का "माधव" नाम जपना चाहिये । वे जपने लगे, उनका भतीजा भी चुपके से उनके पास आकर बोला - "आज तो बचाओ ।" विभूतिभूषण ने उसे भी चुपके से कहां- "माधव-माधव जपो ।" 
ना मालूम मास्टर को क्या सूझा वह दोनों लड़कों को छोड़ कर आगे निकल गया । और फिर छुट्टी का घन्टा हो गया । 
इससे सूचित होता है कि कहीं कहीं तो नाम जप का फल प्रत्यक्ष भी देखा जाता है ।
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
######## सत्य राम सा

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