मंगलवार, 24 सितंबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*माखन मन पाहण भया, माया रस पीया ।*
*पाहण मन माखन भया, राम रस लीया ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##भाग १ ##मन*
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एक कामी वेश्या के लिये कलाकन्द(मिठाई) ले जा रहा था, ठोकर खाकर मार्ग में गिर पड़ा कलाकन्द भी रेत में हो गया।
उसने यह सोचकर कि प्यारी वेश्या को यह कलाकन्द देना उचित नही, एक समीप के साधु आश्रम में दे गया ।
साधुओं ने उसे खाया, उनका कुलपति योग्य संत था ।
उसका मन उस दिन भजन में नहीं लगा और कामवासना उठने लगी, वह भजनकुटी से बाहर आया और पुछा कि "कलाकन्द लाने वाला व्यक्ति कौन था ? खोज करने से पता लगा कि वह वेश्या सेवी था कलाकन्द भी उसी के लिये ले जा रहा था किन्तु राह में गिरने के कारण यहाँ दे गया ।
"कामीजन के अन्न से, मन भी कामी होय ।
संत चित्त चंचल हुआ, लगा न हरि में कोय ॥५॥
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्य राम सा ###

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