रविवार, 29 सितंबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*साधु शब्द सुख वर्षहि, शीतल होइ शरीर ।* 
*दादू अन्तर आत्मा, पीवे हरि जल नीर ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##भाग २ ##क्षमा*
#############################एक समय विश्वामित्र, वशिष्ठ को मारने के लिये शस्त्र लेकर वशिष्ठजी की कुटिया के पीछे छिप रहे थे । वशिष्ठजी और उनकी पत्नी की कुछ बातें हो रही रही थी, उसी प्रसंग में वरिष्ठजी विश्वामित्र के तप की प्रशंसा की । उसे सुनते ही विश्वामित्र का विचार बदल गया और वे वशिष्ठजी के चरणों में जा पड़े। यह कथा प्रसिद्ध है ।
इससे सूचित होता है कि क्षमाशील संत शत्रु के भी शुभ गुणों को नहीं छिपाते हैं।
कुलनाशक के भी सुगुण, क्षमाशील मुख गाय ।
विश्वामित्र महान् तप, ऋषि वशिष्ठ बतलाय ॥२८१॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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