🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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६० - पँचम ताल
रस के रसिया लीन भये,
सकल शिरोमणि तहां गये ॥टेक॥
राम रसायन अमृत माते,
अविचल भये नरक नहिं जाते ॥१॥
राम रसायन भर भर पीवै,
सदा सजीवन जुग जुग जीवे ॥२॥
राम रसायन त्रिभुवन सार,
राम रसिक सब उतरे पार ॥३॥
दादू अमली बहुरि न आये,
सुख सागर ता माँहिं समाये ॥४॥
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राम रसायन का माहात्म्य कह रहे हैं -
राम - रसिक, राम - रस में लीन होकर, सर्व - शिरोमणि परब्रह्म जिस निर्विकार स्थिति में है, उसी निर्विकार अवस्था को प्राप्त हुये हैं ।
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जो राम - रसायन रूप अमृत में मस्त हैं, वे कभी भी नरक में नहीं जाते, वे तो निश्चल ब्रह्म रूप हो जाते हैं ।
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जो राम - रसायन को प्रेम - प्याले में भर - भर कर पान करते हैं, वे सदा सजीवन ब्रह्मभाव को प्राप्त होकर युग - युग प्रति जीवित रहते हैं ।
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यह राम - रसायन स्वर्ग, मृत्यु, पाताल तीनों भुवनों का सार तत्व है । जो भी राम - रसिक हुये हैं, वे सभी सँसार - सिन्धु से पार हो गये हैं ।
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राम - रसायन का व्यसनी पुन: जन्म - मरण के प्रवाह में नहीं आता । सुख - सागर रूप जो ब्रह्म है, उसी में समा जाता है ।
(क्रमशः)

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