🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*जिनके हिरदै हरि बसै, सदा निरंजन नांऊँ ।*
*दादू साचे साध की, मैं बलिहारी जांऊँ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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संत दादूजी अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे । मार्ग में एक नदी आई । पानी थोड़ा था और कीचड़ था ।
दादूजी बोले - "संतों ! इसमें दूर दूर पर ५-७ पत्थर डाल दो जिससे पैर कीचड़ में नहीं हो ।"
तब अन्य शिष्य तो पत्थर खोजने लगे और रज्जबजी ने तत्काल अपना शरीर नदी में डाल कर कहा - "भगवन् ! इस शरीर पर पैर रख कर पधारें यह आज आपके चरणों से यह परम पवित्र हो जायगा ।
यह सुन कर अन्य सब गुरु भाईयों ने उनकी बड़ी प्रशंसा की तथा गुरु भी प्रसन्न हुए ।
गुरु सेवा में देह को, शिष्य कुछ समझे नांहि ।
रज्जब ने निज देह को, पटका सरिता माँहि ॥४६॥
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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