🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
.
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
.
५५ - प्रश्न । गज ताल
कौण शब्द कौण परखणहार,
कौण सुरति कहु कौण विचार ॥टेक॥
कौण सुज्ञाता कौण गियान,
कौण उन्मनी कौण धियान ॥१॥
कौण सहज कहु कौण समाध,
कौण भक्ति कहु कौण अराध ॥२॥
कौण जाप कहु कौण अभ्यास,
कौण प्रेम कहु कौण पियास ॥३॥
सेवा कौण कहो गुरुदेव,
दादू पूछै अलख अभेव ॥४॥
जिज्ञासुओं के बोधार्थ प्रभु से प्रश्न कर रहे हैं -
आदि शब्द कौन है ? ओंकार ।
परीक्षक कौन है ? सँत ।
वृत्ति कौन श्रेष्ठ है ? सहज ।
उत्तम विचार कौन है ? ब्रह्म विचार ।
श्रेष्ठ ज्ञाता कौन है ? ब्रह्म - ज्ञानी ।
उत्तम ज्ञान कौन है ? अभेद ज्ञान ।
उनमनी कौन है ? नासिकाग्र पर बाह्य दृष्टि रख, भृकुटी को किंचित् ऊपर मोड़कर अन्तर्लक्ष्य रखते हुये प्राण लय करना ।
श्रेष्ठ ध्यान कौन है ? बाह्य ज्ञान रहित परब्रह्म का अखँड ध्यान ।
सहजावस्था कौन है ? द्वन्द्व रहित ।
उत्तम समाधि कौन है ? निर्विकल्प ।
श्रेष्ठ भक्ति कौन है ? परा ।
आराध्य कौन है ? आत्मा ।
श्रेष्ठ जाप कौन है ? अजपा जाप ।
श्रेष्ठ अभ्यास कौन है ? अहँकार रहित होने का अभ्यास ।
उत्तम प्रेम कौन है ? निष्काम अनन्य प्रेम ।
श्रेष्ठ अभिलाषा कौन है ? राम - मिलन की ।
उत्तम सेवा कौन है ? राम को प्राप्त करके भी भक्ति करना ।
मन इन्द्रियों के अविषय अद्वैत परब्रह्म गुरुदेव ! कहिये आपका इन सब प्रश्नों के विषय में क्या मत है ? उत्तर - सब जीवों से निर्वैर हो, तन मन के विकार त्याग, अहँकार को मेटकर मेरा भजन करना ही उत्तम मत है । इसी से सब प्रश्न हल हो जाते हैं ।
उक्त प्रश्नों के उत्तर की साखी -
*कौण शब्द ?*
- दादू शब्द अनाहद हम सुन्या, नख शिख सकल शरीर ।
सब घट हरि हरि होत है, सहजैं ही मन थीर ॥ (४ - १७२)
*कौण परखणहार ?*
- प्राण जौहरी पारिखू, मन खोटा ले आवै ।
खोटा मन के माथा मारै, दादू दूर उड़ावे॥ (२७ - २०)
*कौण सुरति ?*
- दादू सहजैं सुरति समाइ ले, पारब्रह्म के अँग ।
अरस परस मिल एक ह्वै, सन्मुख रहिबा संग ॥ (७ - २६)
*कौण विचार ?*
- सहज विचार सुख में रहे, दादू बड़ा विवेक ।
मन इन्द्री पसरै नहीं, अंतर राखै एक ॥ (१८ - ३१)
*कौण सुज्ञाता ?*
- दादू सोई पँडित ज्ञाता, राम मिलण की बूझै ॥ (शब्द १९४)
*कौण गियान ?*
- हँस गियानी सो भला, अंतर राखै एक ।
विष में अमृत काढ़ ले, दादू बड़ा विवेक ॥ (१७ - ३)
*कौण उनमनी ?*
- मन लवरू के पँख हैं, उनमनि चढे आकाश ।
पग रह पूरे साच के, रोप रह्या हरि पास ॥ (४ - ३४६)
*कौण धियान ?*
- जहं विरहा तहं और क्या ? सुधि बुधि नाठे ज्ञान ।
लोक वेद मारग तजे, दादू एकै ध्यान॥ (३ - ७५)
*कौण सहज ?*
- सहज रूप मन का भया, जब द्वै द्वै मिटी तरँग ।
ताता शीला सम भया, तब दादू एकै अँग ॥ (१० - ४४)
*कौण समाधि ?*
- सहज शून्य मन राखिये, इन दोनों के माँहिं ।
लै समाधि रस पीजिये, तहां काल भय नाँहिं ॥ (७ - १०)
*कौण भक्ति ?*
- जोग समाधि सुख सुरति सौं, सहजैं सहजैं आव ।
मुक्ता द्वारा महल का, इहै भक्ति का भाव ॥ (७ - ९)
*कौण अराध ?*
- आतम देव अराधिये, विरोधिये नहिं कोइ ।
आराधे सुख ऊपजे, विरोधे दुख होइ ॥ (२९ - २३)
*कौण जाप ?*
- सद्गुरु माला मन दिया, पवन सुरति सौ पोइ ।
बिन हाथों निशिदिन जपे, परम जाप यों होइ ॥ (१ - ६९)
*कौण अभ्यास ?*
- दादू धरती ह्वै रहे, तज कूड़ कपट अहँकार ।
सांई कारण शिर सहै, ताको प्रत्यक्ष सिरजनहार ॥ (२३ - ३)
*कौण प्रेम ?*
- प्रेम लहर की पालकी, आतम बैसे आइ ।
दादू खेलै पीव सौं, सो सुख कह्या न जाइ ॥ (४ - २७६)
*कौण पियास ?*
- कोई बाँछे मुक्ति फल, कोई अमरापुरि बास ।
कोई बाँछे परम गति, दादू राम मिलन की प्यास ॥ (८ - ८१)
*सेवा कौण ?*
- तेज पुँज को विलसना, मिल खेलैं इक ठाम ।
भर - भर पीवै राम रस, सेवा इसका नाम ॥ (४ - २७२)
आपा गर्व गुमान तज, मद मत्सर अहँकार ।
गहै गरीबी बन्दगी, सेवा सिरजनहार ॥ (२९ - २)
*सार मत कौण है ?*
- आपा मेटै हरि भजै, तन मन तजे विकार ।
निर्वैरी सब जीव सौं, दादू यहु मत सार ॥ (२३ - ५)
यद्यपि अन्तिम प्रश्न भजन में नहीं है, किन्तु उत्तर की साखियों में यह साखी मिलती है । अत: इसका भाव यह ज्ञात होता है कि - ऐसा करने से सब प्रश्न हल हो जायेंगे ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें