शनिवार, 28 सितंबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सतगुरु बरजै सिष करै, क्यूँ कर बंचै काल ।* 
*दहदिश देखत बह गया, पाणी फोड़ी पाल ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ##भाग १ ##शिष्य*
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गुरु आज्ञा को तजत ही, शिष्य तुरत दुख पाय ।
केशव खानों में दबा, काढा संतन जाय ॥४२॥
संत दादूजी के पौत्र शिष्य केशवदासजी नारायणा नगर में अतिथियों के लिये भोजन बनाया करते थे एक दिन चूल्हा सुधारने के लिये मिट्टी लाने जा रहे थे ।
दादूजी ने कहा - "अभी मत जाओ।" वे रुक तो गये किन्तु फिर सोचा देर करने से तो फिर चूल्हा सूखेगा नहीं ।
वे संत दादूजी की नजर चुरा कर चल दिये । मिट्टी खोदते समय उन पर खान टूट पड़ी । इधर संत दादूजी को अपने योग बल से इस धटना का ज्ञान हो गया ।
उन्होने अन्य संतों से कहा - "शीघ्र जाओ केशव खान मे दब गया है ।" सन्तों ने जाकर निकाला । कहा भी है -
"केशव शिष्य खानों गया, गुरु का विचार निवार ।
दबा गारतल जाय के, सन्तन लिया निकाल ॥
### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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