मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

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*श्रम नहीं सब कुछ करै, यों कल धरी बनाइ ।*
*कौतिकहारा ह्वै रह्या, सब कुछ होता जाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ समर्थता का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग ३* *भक्त*
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करोली राज्य के बड़ी उदेही गांव में भक्तमाल के कर्ता दादूपंथी भक्त संत राधवदासजी के यहां ब्रामण भोजन था । संख्या बढ जाने से घृत की कमी हो गई । मालपूड़ों की तई चल रही थी । 
शीध्र घृत प्राप्त न हो सका । राधवदासजी समीप के तालाब से जल के पीपे भर लाये और घृत के स्थान में जल तई में डाल दिया । वह जल घृत बन गया । फिर घृत आने पर उतने ही पीपे घृत के तालाब में डाल दिये । 
इससे सूचित होता है कि भक्तों के कार्य में जल भी घी का काम दे देता है ।
भक्त जनों के कार्य में, जल भी दे घी काम ।
राधवदास के ताल जल, बनासु घृत अभिराम॥३६४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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