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*दादू साहिब कसै सेवक खरा, सेवक को सुख होइ ।*
*साहिब करै सो सब भला, बुरा न कहिये कोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिख का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *श्रद्धा विश्वास*
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एक अंग्रेज अपनी नव विवाहिता पत्नी के साथ जहाज में समुद्र में यात्रा कर रहा था । मार्ग में भारी तूफान आया । सब यात्री धबरा उठे किन्तु अंग्रेज जरा भी नहीं धबराया ।
उसकी पत्नी व्याकुल होकर बोली - "आप निश्चित कैसे हो ?" अंग्रेज ने म्यान से तलवार निकाल कर पत्नी के सिर पर रख दी और हँसते हुये पूछा - "तुम डरती हो या नहीं ?"
पत्नी - "मेरी बात का उत्तर न देकर यह क्या खेल कर रहे हो ?" आपके हाथ में तलवार हो और मैं डरूं ये कैसी बात है ? "आप क्या मेरे शत्रु है ? आप तो मुझे अपने प्राणों से भी अधिक प्यारी मानते हैं ।"
अंग्रेज - "जैसे तू मेरे हाथ की तलवार से नहीं डरती, वैसे ही मैं भगवान से हाथ के तुफान से नहीं डरता । भगवान का जीवों पर अपार प्रेम है । वे वही करते हैं जिससे जीवों का कल्याण हो । फिर डर किस बात का ?"
इस कथा से यह सूचित होता है कि भगवान पर विश्वास रखने वालों को भय नहीं होता ।
विश्वासी को भय न हो, इसमें संशय नांहि ।
भय न हुआ अँग्रेज के, मन में सागर माँहि ॥२३२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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