बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

= ९५ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दुर्बल देही निर्मल वाणी,*
*दादू पंथी ऐसा जाणी ।*
*काहू जीव विरोधे नांही,*
*परमेश्‍वर देखे सब माँही ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिख का अंग)*
====================
साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
.
*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *ईश्वर* 
############################
.
कांचीपुरी के भक्त विष्णुदासजी ने भोजन तैयार करके भगवान के भोग लगाने की तैयारी की कि भोजन किसी ने चुरा लिया । इसी प्रकार सात दिन तक होता रहा किन्तु पता नहीं लगा कि भोजन कौन ले जाता है । इससे उनके सात उपवास हो गये । 8 वें दिन विष्णुदास सतर्कता से छिपकर देख रहे थे कि एक अति दुर्बल चाण्डाल भोजन को उठाकर चला ।
विष्णुदासजी ने कहा - "भैया ! ठहरो रूखा-सूखा क्यों खाते हो, यह घी भी ले लो ।" चण्डाल भय से कांपता हुआ भागने से मूर्च्छित होकर गिर पड़ा, हवा आदि करके विष्णुदास ने सचेत किया, जब वह सचेत हो करके उठा तब विष्णुदासजी ने उसे विष्णु रूप में देखा, फिर भगवान ने विष्णुदासजी को अपने सामान रूप देकर के बैकुण्ठ धाम में पहुचा दिया ।
विष्णुदास को चण्डाल पर दया करने से ही ईश्वर चण्डाल में ही प्रगट होकर दर्शन दिये । इससे ज्ञात होता है कि दयालू ही ईश्वर-दर्शन का अधिकारी है ।
दयावान को सहज ही, हरि के दर्शन होय ।
विष्णुदासजी को दरश, दिया श्वपच हरि होय ॥८१॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें