शनिवार, 12 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य १.चौबोला - १७) =

#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= फुटकर काव्य १.चौबोला - १७ =* 
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*थरौ लीपि का कीजिये शिवहार हि पय पान ।* 
*बहर बलाइन समझई बौरी नैक न ज्ञान ॥१७॥* 
अरी साधिके ! इस स्थान शुद्धि या शरीर शुद्धि आदि से क्या तुझको प्रभु का साक्षात्कार हो सकेगा ? ये शंकर के आभूषण(सर्प) को दूध पिलाने के समान हैं । ये सब तो बाहर से आयी विपत्ति के समान हैं । अरी पागल ! तुझको इतना भी ज्ञान नहीं है ! ॥ 
(इस दोहे में चार ग्रामों के नाम निकलते हैं – १. थरौली, २. शिवहार(सिंवार) ३. बहर = बहराँवड़ा(जयपुर) एवं ४. बौंली(जि. जयपुर) ये सब उसी क्षत्र में हैं जहाँ श्री सुन्दरदास रामत किया करते थे ॥) 
॥ फुटकर काव्य का चौबाला भाग सम्पन्न ॥ 
॥ इति चौबोला ॥१॥
(क्रमशः)

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