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*दादू जब प्राण पिछाणै आपको, आत्म सब भाई ।*
*सिरजनहारा सबनि का, तासौं ल्यौ लाई ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *समता*
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भक्त नामदेवजी को उनकी मां ने काढे के लिये पलास की छाल लाने को कहा । वे गये और पलास की छाल उतार करके सोचा कि अपने पैर की छाल उतार कर भी देखूं तो सही, क्या होता है ? पैर की चमड़ी उतरते ही दर्द हुआ तब वे समझ गये कि सब को समान ही दर्द होता है । उसकी माता ने पूछा - नामदेव धोती में रुधिर कैसा लगा है ? नामदेव ने उपरोक्त सब बात कह दी । यह सुनकर माता ने कहा - नामदेव ज्ञात होता है कि तू महान संत होगा । कारण समता ही संतत्व का श्रेष्ठ साधन है और वह तुझमें दीखता है ।
समता ही संतत्व का, सुचिहन माना जाय ।
नामदेव की मात ने, कहा यही सुख पाय ॥३११॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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