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*शब्दों माहिं राम धन, जे कोई लेइ विचार ।*
*दादू इस संसार में, कबहुं न आवे हार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शब्द का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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एक कर्षा के दस पुत्र थे, जब कर्षा बहुत वृद्ध हो गया तब एक दिन दसों पुत्रों को बुलवा कर उन्हें कच्चे सूत के धागे देकर तोड़ने को कहा, सबने तोड़ दिया । फिर बहुत से धागों की डोरी बना कर तोड़ने को कहा, किन्तु उसे दसों मिलकर भी नहीं तोड़ सके ।
कर्षा ने कहा - "देखो एक एक रहोगे तो तुम कच्चे धागों की भाँति टूट जाओगे और सब मिलकर के रहोगे तो डोरी की भाँति किसी से भी नहीं टूटोगे। इससे सूचित होता है कि घर में एकता रहने से दूसरों का जोर नहीं चल सकता ।
यदि घर में हो एकता, चलत न पर का जोर ।
तन्तु तोड़ पटके सभी, तोड़ सके नहिं डोर ॥३०६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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