शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

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*दादू हम काइर कड़बा कर रहे, शूर निराला होइ ।*
*निकस खड़ा मैदान में, ता सम और न कोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *तप* 
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भीष्मजी का व्रत था कि - मैं विवाह नहीं करूंगा ।
अम्बा उनके गुरु परशुरामजी के शरण गई । परशुराम अम्बा को साथ लेकर भीष्म के पास जाकर बोले - अम्बा से विवाह करो ।
भीष्म ने अपना व्रत बता दिया ।
परशुरामजी ने कहा - या तो अम्बा से विवाह करो या युद्ध करो ।
दृढव्रति भीष्म ने अपना व्रत नहीं छोड़कर युद्ध करना ही स्वीकार किया और उस युद्ध में परशुरामजी को हार ही माननी पड़ी ।
इससे यह सूचित होता है कि दृढव्रति से महाबली भी हार मानता है ।
मानत है दृढव्रति से, महाबली भी हार ।
परशुराम ने भीष्म से, हार शस्त्र दिये डार ॥२४८॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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