रविवार, 20 अक्टूबर 2019

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*आत्म भाई जीव सब, एक पेट परिवार ।*
*दादू मूल विचारिये, तो दूजा कौन गँवार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *परोपकार* 
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लगभग नौ सौ साल पूर्व गुजरात के राजा भीमदेव के राज्य में आकाल पड़ा, वर्षा न होने से खेतियां सूख गई । एक गांव के लोग लगान न दे सके । राजा के सिपाहियों ने उनके घर में जो कुछ था सब जब्त कर लिया और उनको अपने साथ ले आये । 
राजा के पुत्र मूलराज ने उनकी दु:ख भरी बातें सुनी और उस दु:ख से प्रजा को बचाने का उपाय भी सोचना आरंभ किया ।मूलराज धुड़सवारी की कला सीख रहा था । राजा ने कहा था "तुम अच्छी तरह सीख लोगे, तब तुम्हे इनाम दिया जायेगा ।"
राजकुमार की कला से प्रसन्न होकर राजा बोले - 'मांगो ।'
मूलराज - 'काल(अकाल) से पीड़ितों की जो चीजें जब्त की हैं, वे उन्हे वापिस लौटा दें और आगे अकाल के समय में लगान माफ कर दिया करें ।
इस वर से राजा तथा प्रजा को बड़ी प्रसन्नता हुई और मूलराज को तो आनन्द हुआ सो अकथनीय ही है ।
अपने हित को छोड़कर, परहित चंहै सुजान ।
मूलराज ने काल का, मांगा माफ लगान ॥१३॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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