मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य २.गूढार्थ - १९/२०) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= फुटकर काव्य २.गूढार्थ - १९/२० =* 
*नयराना व्यापक सकल रकारानि सब ठौर ।* 
*वदेसुवा सब मैं बसै मीनानघ सिर मौर ॥१९॥* 
भगवान् नारायण का सब में वास है । वह निराकार होते हुए भी सर्वत्र दिखायी देता है । यह वासुदेव भगवान् सभी स्थानों मैं व्याप्त है । तथा अनेक नामों से प्रसिद्ध होने के कारण वे सर्वशिरोमणि है ॥१९॥ 
*नाकरिये नहि मांगते कछून लागत दांम ।* 
*रैमानै जु त्रिषा बुझै पी पाणी बिश्राम ॥२०॥* 
यात्री की प्यास तभी शान्त हो सकती है जब वह जल पीकर कहीं कुछ विश्राम करें ॥२०॥
(क्रमशः)

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