#daduji
॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= फुटकर काव्य २.गूढार्थ - १९/२० =*
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*नयराना व्यापक सकल रकारानि सब ठौर ।*
*वदेसुवा सब मैं बसै मीनानघ सिर मौर ॥१९॥*
भगवान् नारायण का सब में वास है । वह निराकार होते हुए भी सर्वत्र दिखायी देता है । यह वासुदेव भगवान् सभी स्थानों मैं व्याप्त है । तथा अनेक नामों से प्रसिद्ध होने के कारण वे सर्वशिरोमणि है ॥१९॥
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*नाकरिये नहि मांगते कछून लागत दांम ।*
*रैमानै जु त्रिषा बुझै पी पाणी बिश्राम ॥२०॥*
यात्री की प्यास तभी शान्त हो सकती है जब वह जल पीकर कहीं कुछ विश्राम करें ॥२०॥
(क्रमशः)

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