बुधवार, 2 अक्टूबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू सब घट मांही रम रह्या, बिरला बूझै कोइ ।*
*सोई बूझै राम को, जे राम सनेही होइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ कस्तूँरिया मृग का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*जहाँ कोई न देखे*
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किसी महात्मा के पास दो आदमी नाम लेने आये । उनमें से एक अधिकारी था, दूसरा अनाधिकारी था । महात्मा कमाई वाले थे । उन्होंने दो बटेरे दे दिये और कहा कि जाओ, इनको अलग-अलग जहाँ जाकर मार लाओ, जहाँ कोई न देखे । 
उनमें से एक तो झट पेड़ ओट में जाकर बटेरे की गर्दन मरोड़ कर ले आया । जो दूसरा था वह उजाड़ में चला गया । अब वो सोचता है कि जब मैं इसको मारता हूँ तो यह मुझे देखता है और मैं इसको देखता हूँ । तब तो हम दो हो गये, तीसरा परमेश्वर देखता है, मगर महात्मा का हुक्म था इसको वहाँ मारो जहाँ कोई न हो ।
आखिर सोच-सोच कर बटेरे को महात्मा के पास ले आया और बोला कि महात्मा जी ! मुझे तो कोई जगह ऐसी नहीं मिली जहाँ कोई न हो क्योंकि मालिक हर जगह मौजूद है । 
महात्मा ने कहा, मैं तुझे नाम दूँगा । दूसरे को कहा जाओ अपने घर । इसलिये अगर मालिक को हर जगह हाजिर-नाजिर समझें, तो हम कोई ऐब, पाप और बुरा काम न करें ।
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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