🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू सिरजनहारा सबन का, ऐसा है समरत्थ ।*
*सोई सेवक ह्वै रह्या, जहँ सकल पसारैं हत्थ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
====================
साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
.
*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग ३* *सौहार्द भक्ति*
#########################
लगभग पौने दो सौ वर्ष पूर्व जनकपुर में एक विधवा ब्राह्मणी के पुत्र का नाम प्रयागदत्त था । वह माता से प्राय: पूछता था कि 'माँ ! मेरे और कोई नहीं है क्या ? माता ने कहा - बेटा ! तुम्हारे एक बहिन है जो अयोध्या के राजकुमार को ब्याही है ।
बालक कुछ बड़ा होने पर बहिन के दर्शन को अयोध्या पहुचा । वहां जिससे भी बहिन बहनोई का पता पूछे वही हँस दे । अन्त में थक कर मणि पर्वत के पास के सहस्त्र शीर्षा मंदिर के समीप धने पेड़ों में एक टीले पर बैठ करके बहन तथा बहिनोई पर अप्रसन्न होकर कह रहा था कि पता नहीं कहां चले गये हैं ? अब उन्हें कहां खोजूं ?
इतने में ही सामने से हाथी पर बैठे हुये बहिन बहिनोई आ पहुंचेे । सीता ने कहा - 'भैया ! माताजी ने मेरे लिये कुछ भेजा है ।' प्रयागदत्त ने कसार की पोटली सीताजी के हाथ में दे दी । सीता ने दो लड्डू लेकर पुन: प्रयागदत्त को दे दिया और उन्हें हर्षित करते हुये कहा - 'माताजी से कहना कि - हम आनंद में हैं' फिर हाथी पर बैठ कर चले गये ।
इससे सूचित होता है कि सौहार्द भाव के भक्तों पर रामजी कृपा करते हैं ।
सौहार्द भक्त पर करत है, कृपा सहज श्रीराम ।
आकर प्रयागदत्त को, दिया भले विश्राम ॥२६६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें