🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
.
७१ - परिचय सत्संग । पँजाबी त्रिताल
अब तो ऐसी बन आई,
राम - चरण बिन रह्यो न जाई ॥टेक॥
साँई को मिलबे के कारण,
त्रिकुटी संगम नीर नहाई ।
चरण - कमल की तहं ल्यौ लागै,
जतन जतन कर प्रीति बनाई ॥१॥
जे रस भीना छावर१ जावै,
सुन्दरि सहजैं संग समाई ।
अनहद बाजे बाजन लागे,
जिह्वा हीणैं कीरति गाई ॥२॥
कहा कहूं कुछ वरणि न जाई,
अविगत अंतर ज्योति जगाई ।
दादू उनका मरम न जानैं,
आप सुरँगे बैन२ बजाई ॥३॥
.
७१ - ७२ में आन्तर साक्षात् सत्संग का परिचय दे रहे हैं - अब तो हमारी ऐसी अवस्था बन गई है - राम - चरण से दूर नहीं रहा जाता ।
.
हम प्रभु से मिलने के लिए ही त्रिकुटी में होने वाले इड़ा - गँगा, पिंगला - यमुना और सुषुम्ना - सरस्वती के संगम में ध्यान रूप स्नान करते हैं अर्थात् आज्ञा - चक्र में ध्यान करते हैं । वहां भगवत् चरणों में वृत्ति अच्छी प्रकार लगती है । इस प्रकार ध्यान रूप उपाय बारँबार करके हमने भगवान् में अनन्य प्रीति की है ।
.
अब जो अद्भुत प्रभु - प्रेम - रस है, उसमें भीगा हुआ मन प्रभु पर निछावर१ हो रहा है और वृत्ति रूप सुन्दरी अनायास ही उनके संग रह कर उन्हीं में समा रही है अर्थात् ब्रह्माकार हो रही है । अब तो अनाहत बाजे बजने लग गये हैं और बिना ही जिव्हा से सविकल्प समाधि में हम भगवान् का यशोगान करते हैं ।
.
हे साधको ! अब तो हमारी अवस्था ऐसी हो गई है, क्या कहें, कुछ कहा नहीं जाता । हृदय के भीतर अखँड ब्रह्म - ज्योति जग रही है ।
उन परब्रह्म का ठीक - ठीक रहस्य तो हम नहीं जान पाते, किन्तु वे मनोहर प्रभु हमारे हृदय में आनँद की बेणु२ बजा रहे हैं ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें