सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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७४ - परिचय । कहरवा
जब घट परगट राम मिले,
आतम मँगल चार चहूं दिशि, जन्म सुफल कर जीत चले ॥टेक॥
भक्ति मुक्ति अभय कर राखे, सकल शिरोमणि आप किये ।
निर्गुण राम निरंजन आपै, अजरावर उर लाइ लिये ॥१॥
अपने अँग संग कर राखे, निर्भय नाम निशान बजावा ।
अविगत नाथ अमर अविनाशी, परम पुरुष निज सो पावा ॥२॥
सोई बड़भागी सदा सुहागी, परकट प्रीतम संग भये ।
दादू भाग बड़े वर१ वर२ कर, सो अजरावर१ जीत गये ॥३॥
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ब्रह्म साक्षात्कार सँबँधी परिचय दे रहे हैं - 
जब अन्त:करण में राम का आत्म रूप से प्रत्यक्ष मिलन हुआ, तब जीवात्मा के लिए चतुष्टय अन्त:करण रूप चारों दिशाओं में तथा बाह्य चारों दिशाओं में आनँद मँगल का ही व्यवहार होने लगा है । अब साँसारिक आशाओं को जीत कर तथा अपने जन्म को सफल करके हम परब्रह्म स्वरूप में लय होने को चले हैं । 
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सर्व - शिरोमणि प्रभु ने ही हमको भक्ति द्वारा साँसारिक वासनाओं से मुक्त किया है और अभय कर रखा हैं । देवताओं से अति श्रेष्ठ निर्गुण निरंजन राम ने स्वयँ ही हमको अपने हृदय में लगाया है ।
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अपने निर्विकार स्वरूप के साथ हमें भी निर्विकार कर रखा है । हमने भी निर्भयता के साथ राम - नाम रूप नगाड़ा बजाकर मन इन्द्रियों के अविषय देवताओं के नाथ अविनाशी अपना जो परम पुरुष है, उन्हीं को प्राप्त किया है । 
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जो सँतजन प्रत्यक्ष में अपने प्रियतम प्रभु के संग हो गये हैं, वे ही सदा सौभाग्य -सँपन्न और बड़भागी हैं । हमारे भी बड़े भाग्य हैं, जो हम उन देवताओं से अति श्रेष्ठ१ परब्रह्म वर१ को वरण२ करके उसके तद्रुप अजन्मा१ स्थिति प्राप्त करने से यह मानव - देह - गढ को जीत गये हैं ।
(क्रमशः)

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