🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
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*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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८० - नाम महिमा । झपताल
गोविन्द ! नाम तेरा, जीवन मेरा, तारण भव पारा ।
आगे इहिं नाम लागे, सँतन आधारा ॥टेक॥
कर विचार तत्व सार, पूरण धन पाया ।
अखिल नाम अगम ठाम, भाग हमारे आया ॥१॥
भक्ति मूल मुक्ति मे, भव जल निस्तरना ।
भरम कर्म भँजना भय, किल्विष सब हरना ॥२॥
सकल सिद्धि नव निधि, पूरण सब कामा ।
राम रूप तत्व अनूप, दादू निज नामा ॥३॥
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नाम महिमा कह रहे हैं - हे गोविन्द ! आपका नाम मेरा जीवन है और साँसारिक वासना - सरिता से तार कर सँसार - सागर से पार करने वाला है । पूर्व काल के सन्त इस नाम के चिन्तन में ही लगे था । यह आप का नाम ही सँतों का आधार है ।
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हमने विचार करके ही तत्व - ज्ञान का भी सार नाम रूप धन प्राप्त किया है । नाम ही हमारा सर्वस्व है । नाम ही अगम धाम रूप परब्रह्म को प्राप्त कराता है । यह भाग्यवश ही हमारे हृदय में आया है ।
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नाम ही भक्ति और मुक्ति का मूल कारण है । सँसार - सिन्धु के मनोरथ - जल से पार करने वाला है । भ्रम, कर्म और भय को नष्ट करने वाला है । सम्पूर्ण पाप और विकारों को नष्ट करने वाला है ।
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सम्पूर्ण सिद्धियों और नव निधियों को देने वाला है । सम्पूर्ण कामना पूर्ण करने वाला यह राम नाम निज नाम होने से अनुपम तत्व है ।
(क्रमशः)

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