🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू आनंद सदा अडोल सौं, राम सनेही साध ।*
*प्रेमी प्रीतम को मिले, यहु सुख अगम अगाध ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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हरि प्रेमी के कीर्तन में अदभूत रस -
कीर्तन हरि के प्रेमि का, अदभूत रस युत होय ।
तानसेन नृपहिं कहा, था हरि के हित सोय ॥
अकबर बादशाह तानसेन के साथ उनके गुरु हरिदासजी के दर्शन करने गया था । हरिदासजी के मुख से एक भजन सुन कर बादशाह बड़ा प्रसन्न हुआ ।
अपने स्थान पर आकर तानसेन से कहा - "जो हरिदासजी ने सुनाया था वही भजन सुनाओ ।"
तानसेन ने सुनाया किन्तु बादशाह बोला - "वैसा रस तो नहीं आया ।" तानसेन -" वैसा रस कैसे आता, गुरुजी तो भगवान को सुना रहे थे और मैं आपको ।"
इससे सूचित होता है कि हरि प्रेमी के कीर्तन में अदभुत रस होता है ।
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ###
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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