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*दादू पलक मांहि प्रकटै सही, जे जन करैं पुकार ।*
*दीन दुखी तब देखकर, अति आतुर तिहिं बार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *दया*
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एक समय अकबर बादशाह की आज्ञा से किसी कारण वश राजा बीरबल एक विशाल सेना लेकर कश्मीर प्रदेश की ओर गये थे । वहाँ 'भम्भर' नामक घाटी में जब पहुँचे तो किसी अनजान व्यक्ति ने कुछ उच्च शब्द कर दिया । (झमीर घाटी मे कोई उच्च शब्द होता है तो वहां बर्फ के शिखर गिर जाते है) उससे दोनों के बर्फ के शिखर गिरने लगे ।
राजा बीरबल ने भारी विपत्ति जानकर अपने गुरुदेव सन्तवर दादूजी का स्मरण करते हुये उनसे अपनी रक्षा के लिये आर्त्त स्वर से प्रार्थना की । अपनी योग-शक्ति के प्रभाव से राजस्थान में स्थित संत दादूजी ने अपने भक्त की आर्त्त पुकार सुनते ही तत्काल घाटी में प्रकट होकर उन सब की रक्षा की । बर्फ के शिखरों को गिरने से रोक दिया और बीरबल को दर्शन तथा धैर्य देकर अन्तर्धान हो गये ।
सुनत आर्त स्वर शीध्र ही, दयालु करत सहाय ।
करी बीरबल की तुरन्त, दादू रक्षा जाय ॥१४२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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