गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य १.चौबोला - १३.१४) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली*
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी,
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान)
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*= फुटकर काव्य १.चौबोला - १३.१४ =*
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*बलकल वोढें का भयौ का बिलमाहिं रहाइ ।* 
*का समीर साधन किये लाहो नूर दिषाइ ॥१३॥* 
वृक्षों की छाल पहनने से या किसी गुफा में रहने से, या भोजन त्यागकर केवल वायु के आहार मात्र से उस तेज: पुन्ज का साक्षात्कार होना सम्भव नहीं है ॥१३॥ (इस पद में काश्मीर, वलख बुखारा, काबुल एवं लाहौर – इन चार नगरों के नाम निकलते हैं । ला हौ नूर में ‘न’ का लोप करना पड़ता है ।) 
*आगरा सु मम है दिलि मैं और न कोइ ।* 
*पट नारी तातें भई राजमहल मैं सोइ ॥१४॥* 
मन में जो आ गया वह मेरा पीव(पति) ही है, अन्य कोई नहीं । इसी कारण आज मैं *पटराणी* कहलाती हूँ तथा राजमहल में महँगे पलंगों पर सोती हूँ ॥१४॥ (इस पद में आगरा, दिल्ली, पटना एवं राजमहल) – इन चार नगरों के नाम निकलते हैं ॥
(क्रमशः)

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